है हर तरफ क्यूँ शोर इतना
है मचा कोहराम कैसा?
सोचने को भी हमें अब
क्या इजाजत चाहिए?
हर शख्स जिन्दा लाश क्यूँ
जीवन विकट क्यूँ चाहिए?
हो रहा संभव असंभव
हर दफा हर मोड़ ही
हर बार कोशिश जीत की
फिर हारना क्यूँ चाहिए?
हो अगर ऐसी सुबह
फिर शाम निकट ही चाहिए !
बुनता नहीं कोई भी सपना
मुश्किल बड़े हालात हैं
इंसानियत से भी बड़े
इंसान के जज्बात हैं
जूझते कब तक रहें
दो पल अकेला चाहिए
हो अगर ऐसी सुबह
फिर शाम निकट ही चाहिए !
excellent bhaiya
ReplyDeleteThanx bhai...
ReplyDeleteTodu ! :D
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