छूट भी जाये ये जो लम्हे
क्या गम है, क्या हम हैं !
टूट भी जाये मेरे सपने
क्या गम है, क्या हम हैं !
ना उम्मीदी की आदत हो
ना आशा और ना चाहत हो
सब पाया सब छूट गया
क्या गम है, क्या हम हैं !
तू रूठे क्यूँ, तू टूटे क्यूँ
क्यूँ है सच तू और झूठे क्यूँ
बकवासों से दूर बढ़ा जा
क्या गम है, क्या हम हैं !
अश्रु की भी बात निराली
गालों जैसा आँख में लाली
यादों में केवल दर्द सना है
क्या गम है, क्या हम हैं !
जो रिश्ते-नाते भीड़ बने हैं
दर्द मेरा, वो आँखें नम हैं
जीने की तो दौड़ ही झूठी
बस रुक, क्यूंकि सांसें कम हैं !
तू देख अनंत आकाश ये अपना
उस पार ही अंतिम धाम है अपना
उस पल तक नौटंकी सारा
क्या गम है, क्या हम हैं !
छूट भी जाये ये जो लम्हे
क्या गम है, क्या हम हैं !
टूट भी जाये मेरे सपने
क्या गम है, क्या हम हैं !
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