Wednesday, December 29, 2010

कवि नहीं जो कविता कर दूँ

कवि नहीं जो कविता कर दूँ
खुशियों से जीवन कैसे भर दूँ?


वर्ष नया
अवसाद पुराना
जीवन का ये राग पुराना
अभी नहीं
और कभी नहीं
कैसे सपनों को सच्चा कर दूँ?
कवि नहीं जो कविता कर दूँ
खुशियों से जीवन कैसे भर दूँ?


कोशिश अनंत
कितने प्रेम प्रसंग
कुछ लोग हैं बिछड़े
कुछ लोग हैं संग
कैसे प्रियतम के आलिंगन में
खुद को हर पल कैद रखूं?
कवि नहीं जो कविता कर दूँ
खुशियों से जीवन कैसे भर दूँ?


नयी सुबह
और शोक पुराना
संतुष्टि से मैं अनजाना
किस्मत तो निश्चित बदलेगी
कैसे आँसू ख़तम करूँ मैं?
कवि नहीं जो कविता कर दूँ
खुशियों से जीवन कैसे भर दूँ?


नयी जगह यह
राह नयी
लोग नए
अहसास नयी
लेकिन
कैसे बिछड़े पल की
भरपाई मैं आज करूँ?
कवि नहीं जो कविता कर दूँ
खुशियों से जीवन कैसे भर दूँ?

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