Wednesday, February 16, 2011

दिल की सारी मैं बात लिखूं

कुछ दर्द लिखूं
कुछ मर्ज लिखूं
अहसास लिखूं
अवसाद लिखूं

एक नहीं सौ बार लिखूं
दिल की सारी मैं बात लिखूं |

आँखों की भी बात लिखूं
और काजल का भी दर्द लिखूं
झील सी आँखें सबने देखीं
अपनी आँखों से बात लिखूं |

आगे तो सब बढ़ ही जाते हैं
पीछे मुड़ने की बात लिखूं
इस कोलाहल से दूर कहीं
खेत-खलिहानों की बात लिखूं |

सपनों की जो बात लिखूं
तो अपनों की भी बात लिखूं
गाँव की गलियों में खोने का
फिर से नया अहसास लिखूं |

डिस्को की नंगी बात लिखूं
तो आँचल का आदर्श लिखूं
बिखर गया संस्कार हमारा
कैसे उनका उपहास लिखूं ?

सूट-बूट में ढोंगी दुनिया
मैं तो लंगोटिया यार लिखूं
दर्द नया जब भी दस्तक दे
अपनी बातें हर बार लिखूं

एक नहीं सौ बार लिखूं
दिल की सारी मैं बात लिखूं |

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