Saturday, September 15, 2012

आओ अब इजहार करूँ मैं

बिरहा का कोई दर्द सुने जो
व्याकुल मन पल भर इठलाये,
वरना सूखे इस जीवन में
हरियाली कौन कहाँ से लाये?
बूंदाबांदी को मन तरसे
बिन बारिश सावन बीत गया,
आओ अब इजहार करूँ मैं
बिन उनके जीवन बीत गया !



टूटी मेरी यादें हैं
और टूट गए हैं सारे सपने,
एक प्रेमी बिन जीवन कैसा
सब दूजे ना कोई अपने |
सीना है कब्र, दर्द दफ़न है
प्रेमी होता तो मैं मतवाला,
ऐसा जिसपे मैं मरना चाहूँ
और वो भी मुझपे मरनेवाला |
इंतजार गहरी आँखों का
हर गहराई अब बीत गया,
आओ अब इजहार करूँ मैं
बिन उनके जीवन बीत गया !



मैंने सोचा प्रेम मिलेगा
निश्चित ही दो नयनों से,
खन-खन खनकेगी वो दुल्हन
सजी रहेगी गहनों से |
शौक मेरा वो गाल गुलाबी
उनके होठों से पीने का,
बलखाती जब चले हसीना
फख्र हो मतलब जीने का |
सिन्दूरी रंगों से अब
ना जाने क्यूँ मन रूठ गया,
आओ अब इजहार करूँ मैं
बिन उनके जीवन बीत गया !



सुन लो, अहसास मुझे है हर पल
सौ दर्द दफ़न है सीने में,
प्रेमी संग ये दुनिया इठलाये
बिन प्रेमी मौत है जीने में |
सेज सुहाग सजाता मैं भी
वो लाल गुलाबी फूलों से,
उनको भी दुनिया दिखलाता
फिर अपनी बाहों के झूले से |
लेकिन अफ़सोस मगर है इतना
बिन मिले ही मुझसे दूर गया,
आओ अब इजहार करूँ मैं
बिन उनके जीवन बीत गया !



मैं भी एक कोमल चेहरे पर
हर शाम न्योछावर हो सकता था,
उनकी आँखों से व्यथा मैं हर पल
अपने सीने में भर सकता था |
गर्माहट उनके  साँसों की
मदहोश, जोश भर जाती,
आलिंगन-बद्ध जब हम होते
मुझको बेकाबू कर जाती |
आंखें पथरायी ही रह गयी
राही इस पथ से रूठ गया,
आओ अब इजहार करूँ मैं
बिन उनके जीवन बीत गया !

3 comments:

  1. Amazing...I loved it a lot...मैं भी एक कोमल चेहरे पर
    हर शाम न्योछावर हो सकता था,
    उनकी आँखों से व्यथा मैं हर पल
    अपने सीने में भर सकता था.. I wish these lines would come true...

    ReplyDelete
  2. This comment has been removed by a blog administrator.

    ReplyDelete